क्या मैं प्रेगनेंसी में भूना चना खा सकती हूं?HealthPlanet

Posted on Thu 13th Oct 2022 : 10:25

हेल्दी चना, जानिए खाने का सही तरीका
क्या आपका मन जंक फूड खाने को करता है, लेकिन आप कुछ भी अनहेल्दी खाकर अपनी तबीयत खराब नहीं करना चाहती हैं। आप यह भी चाहती हैं कि खाना चटपटा हो, लेकिन पौष्टिकता से भरा हो। माना कि इनदिनों आपको मीठे की क्रेविंग (Craving) होती है, लेकिन खा-खाकर खुद को डोनट्स या कपकेक जैसा न बनाएं। जरूरत से ज्यादा मीठा और फ्राइड खाना डिलीवरी के वक्त परेशानी पैदा कर सकता है।

चटपटा खाएं, मगर कुछ अच्छा खाएं। चना ऐसा आहार है, जिसमें आपकी छोटी-छोटी भूख को शांत रखेगा। साथ ही कई पौषक तत्व भी प्रदान करेगा। फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, फॉलेट और प्रोटीन जैसे गुणों से भरपूर चना खाने में भी बहुत टेस्टी होता है। आप अपनी डाइट में इसे जरूर शामिल करें। सप्ताह में कम-से-काम दो बार इसे खाएं।
​क्या गर्भवती महिला चना खा सकती है?

बेशक गर्भवती महिला चना खा सकती है। प्रेग्‍नेंसी में एक महिला को बाकी सभी तत्वों के अलावा फॉलिक एसिड की भी आवश्यकता रहती है। इसलिए प्रेग्‍नेंसी में फोलिक एसिड की दवाइयां दी जाती हैं। यह विटामिन B6 का एक कृत्रिम रूप है। यह नॉन-वेजिटेरियन खाने जैसे अंडा आदि में सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह काबुली चना में भी प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए आप निश्चिंत होकर चना खा सकती हैं।

यूनाइटेड डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) के अनुसार एक कप यानी 164 ग्राम चना में 269 कैलोरी, 14.53ग्राम प्रोटीन, 44.97 कार्बोहाइड्रेट, 12.5 ग्राम फाइबर, 80 मिलीग्राम कैल्शियम, 276 मिलीग्राम फॉस्फोरस, 79 मिलीग्राम मैग्नीशियम, 477 मिलीग्राम पोटैशियम, 80 मिलीग्राम कैल्शियम और 282 माइक्रोग्राम फॉलेट पाया जाता है। तो सोचिए कि एक चना में कितने गुण हैं।

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​चना खाने के फायदे

चना या चने की फलियां गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अति आवश्यक है। यदि आप काला चना या काबुली चना की तुलना में हरे चने की फलियां खाती हैं तो आपको ज्यादा मात्रा में फॉलेट और प्रोटीन मिलेगा। इसे खाने के निम्नलिखित फायदे हैं-

गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास के लिए फॉलेट बेहद जरूरी है। यह बच्चे की वृद्धि में मदद करता है और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (Neural tube defect) को रोकता है। एक गर्भवती महिला को एक पूरे दिन में काम से कम 400 माइक्रोग्राम फॉलेट की जरूरत होती है। चना इसकी पूर्ति करता है।
चना, रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को बैलेंस रखता है। जबकि हॉर्मोन में होने बादलाव के कारण प्रेग्‍नेंसी में शुगर लेवल बढ़ जाता है। रोजाना चना खाना फायदेमंद हो सकता है। एक कप चना आपको लगभग 12 ग्राम फाइबर देता है।
यदि आपको दमा की शिकायत है, तो चना जरूर खाएं। प्रेग्‍नेंसी में यह आपको दोगुना फायदा देता है। एक तो आपको बार-बार भूख नहीं लगेगी। दूसरा चना चबाने से आपकी मांसपेशियां स्वस्थ रहेंगी। यदि आपको सांस लेने में तकलीफ है या दमा की बीमारी है, तो चना बच्चे में इस रिस्क को कम करेगा।
अक्सर प्रेग्‍नेंसी में कब्ज की दिक्कत हो जाती है। इसे दूर करने के लिए रोस्टेड काले चने खाएं। यह दांतों और मसूड़ों को तो स्वस्थ रखेगा, बल्कि कब्ज भी भगाएगा।
प्रेग्‍नेंसी में हीमोग्लोबिन काम हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर गर्भवती महिला को चना-गुड़ खाने की सलाह देते हैं। चना, आयरन का अच्छा स्रोत है।

​चना के साइड इफेक्ट्स

यदि आप जरूरत से ज्यादा कोई चीज़ खाएंगे तो निश्चित तौर पर आपको दिक्कत होगी। आमतौर पर प्रेग्‍नेंसी में खाने के टेस्ट बदल जाते हैं। कुछ चीजें है, जो इस समय आपको दिक्कत कर सकती हैं। हालांकि चना से बहुत कम साइड इफेक्ट्स होते हैं। इनमें ये प्रमुख हैं-

गैस और एसिडिटी
दस्त और उल्टी
खून में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाना
सिरदर्द
गला सूखना

चना की कई रेसिपीज हैं। काले चने का पानी उल्टी में बहुत फायदा पहुंचता है। चने और आलू को बॉयल करके उनकी चाट बना सकते हैं।

चना और मुरमुरा को साथ मिलाकर झालमूड़ी बनाकर खाएं।
काबुली चना की टिक्की बनाकर खा सकते हैं। गर्मियीं इसे दही और लाल चटनी के साथ खाएं।
लेफ्टओवर चना को ब्लेंड करके परांठा बनाकर खाएं।
भूख शांत करने के लिएवरोस्टेड चना और गुड़ कहा सकते हैं।

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